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Monday, August 17, 2020

सरकार नहीं मानी तो कलेक्टर के पास पहुंचे बस संचालक, 3 दिन के भीतर मदद का मिला आश्वासन, मांगें पूरी नहीं हुई तो करेंगे भूख हड़ताल


रायपुर : प्रदेश में कोरोना संकट के बीच बस संचालकों की समस्या सुलझने के नाम नहीं ले रही है. यातायात संघ ने बस संचालन को लेकर शर्तें तो सरकार के समक्ष रख दी है, लेकिन शासन उन शर्तों पर अमल करेगी, इसके आसार कम ही नजर आ रहे हैं. यही वजह है कि अब संघ कर्मचारियों ने कलेक्टर दफ्तर की ओर कूच किया है.

राजधानी रायपुर के बस संघ कर्मचारियों ने सोमवार को कलेक्टर डॉक्टर भारती दासन से मुलाकात की. संघ ने अपनी समस्याओं को बताते हुए मांगों को पूरी करने गुहार लगाई. वहीं कलेक्टर ने भी उनकी समस्याओं को सुनते हुए हर संभव मदद का आश्वासन दिया है.

बस संघ के कर्मचारी संगठन के अध्यक्ष जितेंद्र शुक्ला ने कहा कि सरकार को कई बार मांगों से अवगत कराया जा चुका है, लेकिन इसे लेकर सरकार गंभीर नहीं है. करीब 10 दिन पहले भी ज्ञापन सौंपा गया था, जिसमें तमाम मांगों का जिक्र किया गया था. साथ ही 10 दिन के अंदर मांगें नहीं मानने पर सीएम बंगले के सामने भूख हड़ताल पर जाने की बात भी कही गई थी, जिसका आज आखिरी दिन था.

कर्मचारी संगठन के अध्यक्ष जितेंद्र शुक्ला ने कहा, आज हम भूख हड़ताल पर बैठने वाले थे, लेकिन पंडरी बस स्टैंड में आरटीओ प्रशासन ने प्रशासनिक स्तर पर समस्या का निराकरण कराने का आश्वासन दिया है. इसके बाद कर्मचारी सहित रायपुर कलेक्टर से मुलाकात करने पहुंचे हैं.

उन्होंने बताया कि कोरोना से उपजे बस संचालकों पर संकट के संबंध में कलेक्टर डॉ. एस भारतीदासन को अवगत कराया गया है, जिस पर कलेक्टर ने 3 दिन के भीतर कर्मचारियों के हर संभव मदद का आश्वासन दिया है. कलेक्टर ने यह भी कहा कि सभी बस संघ कर्मचारियों का रजिस्ट्रेशन करा जाएगा, उनका लेबर कार्ड भी बनवाया जाएगा.

जितेंद्र शुक्ला ने यह भी कहा है कि आश्वासन के बाद भी अगर मांगों पर अमल नहीं किया गया तो बस संघ अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर जाएंगे. उन्होंने कहा है जब तक मांगे पूरी नहीं होगी हड़ताल जारी रहेगी.


यह है प्रमुख मांगे

1. 1 सितंबर 2020 से मार्च 2021 तक के टैक्स में छूट दी जाए.

2. डीजल के वैट टेक्स में 50 फीसदी की कटौती की जाए.

3. फार्म के एवं फार्म एम की साल में 2 माह की बाध्यता समाप्त की जाए. इसके साथ ही इसकी फीस अन्य राज्यों की तरह 10 से 20 रूपए प्रति माह की जाए. छत्तीसगढ़ में यह फीस 500 से 100 रूपए प्रति माह है. इससे राज्य सरकार को कोई आमदनी नहीं होती. यह फीस केंद्र सरकार के खाते में जाती है.

4. बढ़ती डीजल की कीमतों के साथ-साथ यात्री का किराया भी बढ़ाया जाए। इसके लिए स्थाई नीति बनाई जाए.

5. टोल टैक्स में छूट दी जाए.

6.एकल प्राधिकार के बनने से पहले जो काम आरटीओ द्वारा किया जाता था उसे दोबारा लागू की जाए.


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