गरियाबंद। कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि वैज्ञानिक तुषार मिश्रा द्वारा नगर पालिका गरियाबंद द्वारा बनाए गए वर्मी कंपोस्ट टांका का दिनांक 19 अगस्त को निरीक्षण किया गया। उस वर्मी कंपोस्ट इकाई में महिला स्व सहायता समूह द्वारा संचालित केंचुआ खाद उत्पादन के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। जिसमें मुख्य रूप से वर्मी कंपोस्ट या केंचुआ खाद उत्पादन में जानकारी दी गई।
जानकारी देते हुए श्री मिश्रा द्वारा बताया गया कि वर्तमान समय में जैविक खाद का क्या महत्व है और कृषि कार्य में इसकी किस प्रकार से भूमिका हैं। इसकी विस्तृत जानकारी दी गई जिसमें मुख्य रूप से उनके द्वारा केंचुआ खाद के बारे में बताया गया कहा कि इससे कृषि भूमि की उर्वरता बनी रहती है यह लघु कृषकों तथा भारतीय कृषि के योगदान में अहम भूमिका अदा करता है केचुआ कृषि योग्य भूमि में प्रतिवर्ष एक से 5 मिली मीटर मोटी सतह का निर्माण करते हैं । और यह केंचुआ भूमि में निम्न ढंग से उपयोगी एवं लाभकारी हैं जैसे भूमि की भौतिक गुणवत्ता में सुधार, भूमि रसायनिक गुणवत्ता एवं उर्वरता में सुधार लाने का कार्य करती है। वर्मी कंपोस्ट बनाते समय किन बातों का ध्यान रखें एवं सावधानी के बारे में जानकारी दी गई इनमें सावधानी के रूप में विशेष तौर पर वर्मी बेड में ताजे गोबर का उपयोग कदापि ना करें ताजे गोबर में गर्मी अधिक होने कारण केचुआ मर जाते हैं अत: उपयोग से पहले ताजे गोबर को दो से 3 दिन तक ठंडा होने दें। केंचुआ खाद बनाने के दौरान किसी भी तरह की कीटनाशकों का उपयोग ना करें। केचुआ खाद अधिक उत्पादन हेतु बेड में नमी 30 से 35% तथा केचुआ के अधिक उत्पादन के लिए नमी 20 से 30% के बीच रखनी चाहिए केंचुआ को अंधेरा अति पसंद है। अत: वर्मी बेड को हमेशा जूट के बोरे से या सूखी घासफूस पैरा आदि से ढक कर रखना चाहिए। इसके बाद वर्मी टांका से केंचुआ खाद एकत्र करने की विधि की जानकारी दी गई कहा कि केंचुए अपनी प्रवृत्ति के अनुसार ऊपर से नीचे की ओर कचरे को खाना आरंभ करते हैं। अपशिष्ट पदार्थों के वर्मी कंपोस्ट में परिवर्तित हो जाने पर खाद दुर्गंध रहित हो जाता है तथा दानेदार वह गहरे रंग की दिखाई देने लगता है। तथा हाथ से स्पर्श करने से तैयार खाद चाय के दानों के समान लगता है ।
केंचुआ खाद की चेन्नई एवं पैकिंग के लिए क्यारियों में खाद अलग करने के पश्चात 3 से 4 दिन तक उसे छाया में सुखाया जाता है। इसके बाद 3 मिलीलीटर क्षेत्र की छलनी से खाद को छान के अलग किया जाता है। छनाई करते समय छोटे केंचुए को छोटे-छोटे थैलों में भर लिया जाता है। थैलियों में भराई के समय केंचुआ खाद में नमी की मात्रा 15 से 25 प्रतिशत के आसपास होनी चाहिए। केंचुआ खाद से हमें लाभ के रूप में सर्वप्रथम पौधों के लिए आवश्यक लगभग सभी पोषक तत्व पर्याप्त एवं संतुलित मात्रा में मौजूद होते हैं । जो पौधों को सुगमता से प्राप्त हो जाते हैं तथा वर्मी कंपोस्ट के उपयोग से पौधों का विकास अच्छा हो जाता है। इस दौरान कृषि विभाग के कर्मचारी एवं सहायता समूह की महिलाएं उपस्थित थे।