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Thursday, July 9, 2026

अस्पताल परिसर में बिना अनुमति मंदिर निर्माण, सीएमएचओ बोले देंगे नोटिस *माता मालती सेवा आश्रम पर प्रशासनिक शिकंजा, सीएमएचओ ने कार्रवाई के दिए संकेत

 


भुनेश्वर ठाकुर -दंतेवाड़ा 

दंतेवाड़ा। जिला अस्पताल परिसर स्थित माता मालती सेवा आश्रम एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गया है। इस बार मामला सेवा आश्रम परिसर में बने उस राधा-कृष्ण मंदिर का है, जिसकी विधिवत प्राण-प्रतिष्ठा किए जाने के बाद अब उसके पूरे ढांचे को तोड़े जाने के आरोप सामने आए हैं। इस घटनाक्रम ने स्थानीय लोगों के बीच कई सवाल खड़े कर दिए हैं और पूरे मामले की निष्पक्ष प्रशासनिक जांच की मांग तेज हो गई है। जानकारी के अनुसार, माता मालती सेवा आश्रम की स्थापना मूल रूप से जिला अस्पताल में भर्ती मरीजों के परिजनों को ठहरने की सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई थी। समय के साथ यहां बहुमंजिला भवन का निर्माण हुआ, जहां ठहरने सहित अन्य सुविधाओं के लिए शुल्क लिए जाने की बातें भी समय-समय पर सामने आती रही हैं। इसके अलावा परिसर में एक व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स के निर्माण को लेकर भी पहले से सवाल उठते रहे हैं।

प्राण-प्रतिष्ठा के बाद मंदिर ध्वस्त, अब दोबारा निर्माण की चर्चा

स्थानीय लोगों के अनुसार, सेवा आश्रम परिसर में राधा-कृष्ण मंदिर का निर्माण कराया गया था और वैदिक रीति-रिवाजों के साथ उसकी प्राण-प्रतिष्ठा भी संपन्न हुई थी। लेकिन कुछ वर्षों बाद उसी मंदिर के पूरे ढांचे को ध्वस्त कर दिया गया। अब चर्चा है कि उसी स्थान पर फिर से नया मंदिर बनाने की तैयारी की जा रही है।



इसी बात को लेकर लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि मंदिर का निर्माण हुआ था तो क्या इसके लिए संबंधित विभागों और सक्षम प्राधिकारियों से विधिवत अनुमति ली गई थी? और यदि मंदिर को तोड़ा गया, तो क्या उसके लिए भी आवश्यक प्रशासनिक स्वीकृति प्राप्त की गई थी? 


*सरकारी भूमि पर निर्माण को लेकर भी उठे सवाल

मामले में यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि जिला अस्पताल परिसर की सरकारी भूमि पर पहले सेवा आश्रम का विस्तार किया गया और बाद में मंदिर सहित अन्य निर्माण कर स्थायी कब्जे जैसी स्थिति बनाई गई। हालांकि इन आरोपों की अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

यदि संबंधित भूमि स्वास्थ्य विभाग की है, तो यह स्पष्ट होना आवश्यक है कि निर्माण की अनुमति किस विभाग ने दी, किन नियमों के तहत दी गई और मंदिर को हटाने का निर्णय किसके आदेश पर लिया गया।

*आस्था से जुड़ा विषय, लोगों में नाराजगी


स्थानीय नागरिकों का कहना है कि प्राण-प्रतिष्ठित मंदिर केवल एक निर्माण नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की धार्मिक आस्था का केंद्र होता है। ऐसे में यदि किसी मंदिर को हटाने जैसी कार्रवाई की गई है, तो उसके पीछे की पूरी प्रक्रिया सार्वजनिक और पारदर्शी होनी चाहिए। बिना स्पष्ट जानकारी के मंदिर ध्वस्तीकरण की घटना कई गंभीर सवाल खड़े करती है।


*प्रशासन की भूमिका पर टिकी निगाहें

पूरा मामला अब जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की जवाबदेही से जुड़ गया है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो नियमानुसार कार्रवाई की अपेक्षा की जा रही है। वहीं यदि सभी निर्माण एवं परिवर्तन विधिसम्मत पाए जाते हैं, तो प्रशासन के लिए तथ्यों को सार्वजनिक कर स्थिति स्पष्ट करना भी आवश्यक होगा।


*माता मालती सेवा आश्रम के संचालक ने मंदिर निर्माण के लिए स्वास्थ्य विभाग से कभी कोई अनुमति नहीं ली। मामले की जानकारी मिलने के बाद आश्रम संचालक ननकू साहू को नोटिस जारी कर जवाब मांगा जाएगा। यदि सरकारी भूमि पर अवैध निर्माण पाया गया, तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।


*-मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी 

डॉ. अजय रामटेके



* माता मालती आश्रम के बारे में जानकारी मिली है। आश्रम से जुड़े सभी दस्तावेज मंगवाए जा रहे हैं अगर किसी भी प्रकार की अनियमितता सामने आएगी तो निश्चित तौर पर कार्रवाई की जाएगी। सरकारी जमीन पर अगर अतिक्रमण किया गया है तो उसे हटा कर स्वास्थ विभाग को सौंपा जाएगा।


एसडीएम लोकांश एल्मा

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